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विस्तृत उत्तर
तपोलोक को तपस्या का लोक इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका शाब्दिक और पारिभाषिक अर्थ ही 'तपस्या का लोक' या 'तपस्वियों का संसार' है। यह कोई साधारण भोग-भूमि या स्वर्ग के समान ऐश्वर्य का स्थान नहीं है, बल्कि विशुद्ध योगियों, निष्काम तपस्वियों और विशिष्ट देवगणों का नित्य निवास स्थान है। यहाँ वे महान मुनि, सिद्ध और योगी रहते हैं जिन्होंने घोर तपस्या के द्वारा अपनी इंद्रियों को जीत लिया है और अपने अखंड तप से भगवान नारायण को प्रसन्न किया है।
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