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विस्तृत उत्तर
जनलोक तक सामान्य मनुष्य या केवल सकाम कर्म करने वाले लोग नहीं पहुँचते। जनलोक उन निष्काम योगियों, सिद्धों, सन्यासियों और नैष्ठिक ब्रह्मचारियों को प्राप्त होता है जो विशुद्ध सत्त्वगुण में स्थित रहते हैं। निष्काम कर्मयोग, ध्यान योग, कठोर तपस्या, पूर्ण संन्यास और अखंड ब्रह्मचर्य का पालन करने वाले, जिनके पाप नष्ट हो चुके हैं, वे साधक अपने तप के स्तर के अनुसार महर्लोक, जनलोक, तपोलोक और सत्यलोक को प्राप्त करते हैं।
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