विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण के अनुसार एक सच्चे योगी को श्राद्ध भोजन कराने से हजार साधारण ब्राह्मण भोजन के समान पुण्य मिलता है।
विष्णु पुराण में योगी भोजन का फल क्या है को संदर्भ सहित समझें
विष्णु पुराण में योगी भोजन का फल क्या है का सबसे सीधा सार यह है: हजार ब्राह्मण भोजन जैसा पुण्य।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।
उत्तर पढ़ते समय यह देखें कि उसमें नियम, अपवाद और व्यवहारिक संदर्भ साफ हैं या नहीं।
लोक श्रेणी के दूसरे प्रश्न इस उत्तर की सीमा और उपयोग दोनों स्पष्ट करते हैं।
यदि विस्तृत विधि या पृष्ठभूमि चाहिए, तो नीचे दिए गए लेख पहले खोलें।
इसी विषय के 5 प्रश्न
विषय की गहराई समझने के लिए इन संबंधित प्रश्नों को भी पढ़ें
महर्लोक में अष्टसिद्धियों की क्या भूमिका है?
महर्लोक के निवासियों के पास अणिमा, महिमा आदि अष्टसिद्धियाँ हैं जिनसे वे ब्रह्मांड के किसी भी लोक में मन की गति से जा सकते हैं। प्रलय में ये सिद्धियाँ ही उन्हें जनलोक भेजती हैं।
अव्यक्त अस्त्र योगियों के लिए मित्र क्यों है?
क्योंकि यह योगियों के लिए मोक्ष का प्रतीक है।
अग्निष्वात्त पितर कौन हैं?
योगी और तपस्वी पितरों की अमूर्त श्रेणी अग्निष्वात्त है।
भीष्म पितामह ने उत्तरायण में प्राण क्यों छोड़े?
उत्तरायण वह समय बताया गया है जिसे भगवत्परायण योगी चाहते हैं; उसी समय भीष्म ने मन कृष्ण में लगाकर प्राण त्यागे।
योगी देवताओं, ग्रहों और भुवनों को कैसे देखता है?
योगी देवताओं के बिम्ब, विमानों, ग्रहों, नक्षत्रों, तारों, भुवनों और पातालस्थ पदार्थों को समाधि से देख सकता है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
