विस्तृत उत्तर
तपोलोक में शुद्ध चित्त वाले, ऊर्ध्वरेता, सिद्ध तपस्वी और 'वैराज' नामक अयोनिज देवगण निवास करते हैं। शास्त्रों में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि तपोलोक में मुख्य रूप से वैराज नामक देवगण निवास करते हैं। इनके अतिरिक्त वहाँ वे महान मुनि, सिद्ध और योगी भी निवास करते हैं जिन्होंने घोर तपस्या के द्वारा अपनी समस्त इंद्रियों को जीत लिया है और अपने अखंड तप से भगवान नारायण को प्रसन्न कर लिया है। ऐसे सिद्ध आत्माएँ इस लोक में आकर अपनी सभी लौकिक और अलौकिक इच्छाओं तथा महत्वाकांक्षाओं से मुक्त होकर अनंत काल तक शांत, विकाररहित और समाधिस्थ अवस्था में रहते हैं।
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