लोकतलातल की स्त्रियाँ तपस्वियों को भी मोह में कैसे डाल सकती हैं?उनका तीव्र सौंदर्य, रत्नाभूषण, सुगंध और आकर्षण तपस्वियों को भी मोह में डाल सकता है।#तलातल स्त्रियाँ#तपस्वी#मोह
लोकतपोलोक में रहने वाले तपस्वी कैसे होते हैं?तपोलोक के तपस्वी शुद्ध चित्त, ऊर्ध्वरेता, जितेंद्रिय, विकाररहित और समाधिस्थ होते हैं।#तपस्वी#तपोलोक#जितेंद्रिय
लोकतपोलोक को तपस्या का लोक क्यों कहा जाता है?क्योंकि यह निष्काम तपस्वियों, सिद्ध योगियों और वैराज देवगणों का नित्य निवास स्थान है।#तपोलोक#तपस्या#तपस्वी
लोकतपोलोक में कौन निवास करता है?तपोलोक में वैराज देवगण, सिद्ध तपस्वी, महान मुनि और योगी निवास करते हैं।#तपोलोक निवासी#वैराज देवगण#तपस्वी
लोकतपोलोक का अर्थ क्या होता है?तपोलोक का अर्थ है तपस्या का लोक या तपस्वियों का संसार।#तपोलोक#अर्थ#तपस्या
वेद ज्ञानवेदों में ऋषियों का क्या स्थान है?वेदों में ऋषि मंत्रों के द्रष्टा (मंत्रद्रष्टा) हैं — रचयिता नहीं। निरुक्त (2/11) कहता है — 'ऋषयो मन्त्रद्रष्टारः।' विश्वामित्र, वशिष्ठ, अत्रि, भरद्वाज आदि सप्तर्षि वैदिक ज्ञान को मनुष्य-लोक तक ले आए।#ऋषि#वेद#द्रष्टा
शिव अवतारशिव के ब्रह्मचारी अवतार का क्या उद्देश्य था?शिव के ब्रह्मचारी अवतार का उद्देश्य पार्वती के प्रेम और निष्ठा की परीक्षा लेना था। शिव ने ब्रह्मचारी बनकर स्वयं की निंदा की — पार्वती अडिग रहीं। तब शिव प्रकट हुए और पार्वती का सच्चा प्रेम स्वीकार किया।#ब्रह्मचारी अवतार#शिव अवतार#पार्वती परीक्षा