विस्तृत उत्तर
कामदेव के भस्म होने से जगत में मिश्रित प्रभाव पड़ा — कुछ लोग दुखी हुए, कुछ सुखी।
चौपाई — 'हाहाकार भयउ जग भारी। डरपे सुर भए असुर सुखारी। समुझि कामसुखु सोचहिं भोगी। भए अकंटक साधक जोगी॥'
इसका अर्थ — जगतमें बड़ा हाहाकार मच गया। देवता डर गये (क्योंकि अब शिवजी का विवाह कैसे होगा और तारकासुर का वध कैसे होगा)। दैत्य सुखी हुए (क्योंकि शिवजी-पुत्र का भय टला)। भोगी लोग कामसुखको याद करके चिन्ता करने लगे। और साधक तथा योगी निष्कंटक (काम-बाधा से मुक्त) हो गये।
इस प्रकार कामदहन से चार प्रकार के प्रभाव हुए:
- 1देवता — भयभीत (शिवपुत्र बिना तारकासुर नहीं मरेगा)
- 2असुर — सुखी (शत्रु का भय टला)
- 3भोगी — चिन्तित (कामसुख की स्मृति)
- 4योगी/साधक — निष्कंटक (काम-बाधा से मुक्ति)





