ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
वेद ज्ञान📜 ऋग्वेद 1/18/7, 5/81/1, 10/136 (केशी सूक्त), अथर्ववेद 15/17, शतपथ ब्राह्मण 10/3/31 मिनट पठन

वेदों में योग का वर्णन कैसे है?

संक्षिप्त उत्तर

वेदों में योग के मूल तत्त्व — मन की एकाग्रता, प्राण-नियंत्रण और ब्रह्मचर्य — स्पष्टतः मिलते हैं। केशी सूक्त (ऋग्वेद 10/136) में सिद्ध योगी का विशद चित्र है। वैदिक यम, ब्रह्मचर्य और ध्यान-परंपरा ही पतंजलि के योगसूत्र का मूल आधार है।

📖

विस्तृत उत्तर

## वेदों में योग का वर्णन

वेदों में 'योग' शब्द: ऋग्वेद में 'योग' मुख्यतः 'जोड़ना, एकत्र करना, साधन' अर्थ में है। किंतु योग के मूलभूत तत्त्व — मन की एकाग्रता, प्राण-नियंत्रण, इंद्रिय-संयम — वेदों में स्पष्टतः मिलते हैं।

ऋग्वेद में योगिक संदर्भ

(1) सूर्य-उपासना और प्राणायाम (5/81/1): 'युञ्जन्ति ब्रह्म विचरन्ति साधवः।' — ज्ञानी साधु प्राण को एकाग्र (युञ्ज = योग) करते हैं।

(2) केशी सूक्त (10/136): जटाधारी मुनि ('केशी') का वर्णन — जो वायु के साथ विचरता है, सोम पीता है और देवों के साथ रहता है। 'वायोरश्वो देवानां सखा मुनिः' — यह स्पष्टतः एक सिद्ध योगी का चित्र है।

ब्रह्मचर्य — योग का आधार: अथर्ववेद (11/5) में ब्रह्मचर्य को योग-साधना का सर्वश्रेष्ठ आधार बताया गया है।

वैदिक-योग के तत्त्व: यम (नैतिक अनुशासन — अहिंसा, सत्य, ब्रह्मचर्य), प्राण-साधना, ध्यान, तप।

योगसूत्र की वैदिक जड़ें: पतंजलि का योगसूत्र वेदों की योगिक परंपरा का ही व्यवस्थित रूप है।

📜
शास्त्रीय स्रोत
ऋग्वेद 1/18/7, 5/81/1, 10/136 (केशी सूक्त), अथर्ववेद 15/17, शतपथ ब्राह्मण 10/3/3
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

योगवेदऋग्वेदप्राणायामधारणाब्रह्मचर्यकेशी सूक्त

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

वेदों में योग का वर्णन कैसे है — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको वेद ज्ञान से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर ऋग्वेद 1/18/7, 5/81/1, 10/136 (केशी सूक्त), अथर्ववेद 15/17, शतपथ ब्राह्मण 10/3/3 पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।