ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
वेद ज्ञान📜 ऋग्वेद 1/164/20 (दो पक्षी सूक्त), 10/16, अथर्ववेद 9/10, शतपथ ब्राह्मण 10/6/31 मिनट पठन

वेदों में आत्मा का वर्णन कैसे है?

संक्षिप्त उत्तर

ऋग्वेद (1/164/20) के 'दो पक्षी सूक्त' में जीवात्मा और परमात्मा का अनूठा चित्रण है। ऋग्वेद (10/16) में आत्मा की अमरता का वर्णन है। वैदिक आत्मा-दर्शन ही उपनिषदों के महावाक्यों का मूल स्रोत है।

📖

विस्तृत उत्तर

## वेदों में आत्मा का वर्णन

दो पक्षी सूक्त — वेदों में आत्मा का सर्वश्रेष्ठ रूपक (ऋग्वेद 1/164/20)

द्वा सुपर्णा सयुजा सखाया समानं वृक्षं परिषस्वजाते। तयोरन्यः पिप्पलं स्वाद्वत्त्यनश्नन्नन्यो अभिचाकशीति।।

— एक ही वृक्ष पर दो सुंदर पक्षी बैठे हैं। एक (जीवात्मा) फल (संसार-भोग) खाता है; दूसरा (परमात्मा) बिना खाए केवल देखता रहता है।

यह रूपक उपनिषदों और गीता में भी उद्धृत है — जीवात्मा और परमात्मा का सह-अस्तित्व।

आत्मा की विशेषताएं (वैदिक वर्णन)

(1) आत्मा अमर है (ऋग्वेद 10/16): मृत्यु-सूक्त में — 'सूर्यं ते चक्षुर्गच्छतु वातं प्राणः।' — आँख सूर्य में जाए, प्राण वायु में — पर आत्मा अमर रहती है।

(2) आत्मा और प्राण: आत्मा को प्राण (जीवनशक्ति) से अभिन्न बताया गया है।

(3) पितृयान और देवयान: कर्मानुसार आत्मा दो मार्गों से जाती है — पितृलोक या देवलोक।

(4) महावाक्यों की आधारभूमि: इस 'दो पक्षी' सूक्त से ही उपनिषदों के 'अयमात्मा ब्रह्म' और 'अहं ब्रह्मास्मि' का दर्शन विकसित हुआ।

📜
शास्त्रीय स्रोत
ऋग्वेद 1/164/20 (दो पक्षी सूक्त), 10/16, अथर्ववेद 9/10, शतपथ ब्राह्मण 10/6/3
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

आत्मावेदअमरऋग्वेदप्राणअथर्ववेददो पक्षी सूक्त

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

वेदों में आत्मा का वर्णन कैसे है — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको वेद ज्ञान से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर ऋग्वेद 1/164/20 (दो पक्षी सूक्त), 10/16, अथर्ववेद 9/10, शतपथ ब्राह्मण 10/6/3 पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।