विस्तृत उत्तर
वेद किसने लिखे? — बहुस्तरीय उत्तर
1अपौरुषेयता का सिद्धांत (मीमांसा-दर्शन)
वेद अपौरुषेय हैं — अर्थात् इन्हें किसी व्यक्ति ने नहीं रचा। भाष्यकार कहते हैं — *'अपौरुषेयं वाक्यं वेद इत्याह'*। मीमांसक इन्हें स्वयंभू मानते हैं; ये सृष्टि के नियमों की तरह शाश्वत हैं।
2ईश्वरप्रोक्त मत (नैयायिक-दर्शन)
नैयायिक कहते हैं कि ईश्वर ने जैसे सृष्टि की, वैसे ही वेद-ज्ञान प्रकट किया। श्रुति में वर्णन है — वेद परमात्मा के निःश्वास से प्रकट हुए। तुलसीदास ने रामचरितमानस में कहा — *'जाकी सहज स्वास श्रुति चारी'* — भगवान के सहज श्वास से चारों वेद प्रकट हुए।
3ऋषि 'मंत्रद्रष्टा' हैं, रचयिता नहीं
ऋषियों ने गहन ध्यान-समाधि में इन मंत्रों को 'देखा' (द्रष्टा), रचा नहीं। इसीलिए वे 'मंत्रद्रष्टा' कहलाते हैं। शतपथ ब्राह्मण के अनुसार — अग्नि, वायु, आदित्य और अंगिरा ऋषियों ने तपस्या द्वारा क्रमशः ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद को प्राप्त किया।
4महर्षि वेदव्यास — संपादक/संकलक
वेदव्यास (कृष्णद्वैपायन) ने वेद-ज्ञान को सुव्यवस्थित रूप में चार भागों में विभाजित किया। वे वेद के रचयिता नहीं, अपितु संपादक और संकलक हैं। उनका जन्मदिवस 'गुरु पूर्णिमा' के रूप में मनाया जाता है।
संक्षेप
वेद न किसी ने लिखे, न रचे। ये सृष्टि के सत्य हैं, जिन्हें ऋषियों ने समाधि में अनुभव किया और पीढ़ी-दर-पीढ़ी श्रुति-परंपरा से सुरक्षित रखा। व्यास ने उन्हें चार भागों में संकलित किया।





