विस्तृत उत्तर
वेद क्या हैं?
वेद सनातन धर्म के सर्वोच्च, सर्वप्राचीन और सर्वाधिकार-संपन्न धर्मग्रंथ हैं। 'वेद' शब्द संस्कृत की 'विद्' धातु से बना है, जिसका अर्थ है — *जानना* या *ज्ञान*। अर्थात् जो ग्रंथ परम ज्ञान का भंडार हो, वही वेद है।
मूल स्वरूप और परिभाषा
वेद अपौरुषेय हैं — अर्थात् इन्हें किसी मनुष्य ने नहीं रचा। ये ईश्वर की वाणी हैं, जो सृष्टि के आरंभ में परमात्मा ने ऋषियों के हृदयों में प्रकट की। इसीलिए ऋषि 'मंत्रद्रष्टा' कहलाते हैं — उन्होंने इन्हें देखा, रचा नहीं।
मुण्डकोपनिषद में कहा गया है:
ऋग्वेदो यजुर्वेदः सामवेदो ऽथर्ववेदः' — ये चार वेद परमज्ञान के चार स्तंभ हैं।
श्रुति क्यों कहते हैं?
वेद गुरु-शिष्य परंपरा से श्रवण (सुनकर) संरक्षित किए जाते थे, इसलिए इन्हें श्रुति भी कहा जाता है। 'आम्नाय' (परिश्रम से स्मरण) और 'निगम' भी इनके पर्याय हैं।
वेदों का विषय
वेदों में ब्रह्म (ईश्वर), देवता, यज्ञ, आत्मा, सृष्टि, खगोल, भूगोल, आयुर्वेद, गणित, रसायन, धर्म-नियम, नैतिकता — लगभग समस्त ज्ञान समाहित है।
संरचना
प्रत्येक वेद के चार भाग होते हैं:
- 1संहिता (मंत्र-संग्रह)
- 2ब्राह्मण (यज्ञ-विधान)
- 3आरण्यक (अरण्य में विचार)
- 4उपनिषद (ब्रह्मज्ञान)
महत्व
मनुस्मृति में कहा गया है — 'श्रुतिस्तु वेदो विज्ञेयः' — वेद ही श्रुति है, और श्रुति ही सर्वोच्च प्रमाण है। यदि श्रुति और स्मृति में विरोध हो, तो श्रुति (वेद) ही मान्य है।





