विस्तृत उत्तर
## वेदों में ज्ञान का महत्व
ज्ञान-सूक्त (ऋग्वेद 10/71): यह सूक्त वाक् और ज्ञान पर केन्द्रित है। 'उत त्वः पश्यन्न ददर्श वाचम्।' — कोई देखते हुए भी वाक् को नहीं देखता; कोई सुनते हुए भी नहीं सुनता। ज्ञान का द्वार ध्यान और तपस्या से खुलता है।
विद्या के दो स्तर (मुण्डकोपनिषद)
- ▸अपरा विद्या — चारों वेद, व्याकरण, ज्योतिष, निरुक्त — सांसारिक जीवन के लिए
- ▸परा विद्या — ब्रह्मज्ञान — जिससे अक्षर-तत्त्व जाना जाए — मोक्ष के लिए
वेदों में ज्ञान के महत्व के बिंदु
- ▸ऋग्वेद में ज्ञान को अग्नि कहा है — जो अज्ञान के अंधकार को जलाता है
- ▸अथर्ववेद (11/6) में — ब्रह्मचर्य और तपस्या से ज्ञान ग्रहण करने वाला मृत्यु को पार करता है
- ▸गुरु-शिष्य परंपरा ज्ञान-हस्तांतरण की विधि है
- ▸तैत्तिरीय उपनिषद में 'स्वाध्यायप्रवचने च' — स्वाध्याय और प्रवचन (ज्ञान-दान) अनिवार्य
ज्ञान का फल: ज्ञानी देवताओं का प्रिय है; ज्ञान इस लोक और परलोक दोनों में रक्षा करता है।





