विस्तृत उत्तर
चार वेद और उनका परिचय
मुण्डकोपनिषद में स्पष्ट उल्लेख है — 'ऋग्वेदो यजुर्वेदः सामवेदो ऽथर्ववेदः' — ये चार वेद हैं।
1ऋग्वेद (Rigveda)
- ▸विश्व का सर्वप्राचीन साहित्यिक ग्रंथ।
- ▸10 मंडल, 1028 सूक्त, लगभग 10,552 मंत्र (ऋचाएँ)।
- ▸मुख्य देवता: इन्द्र (सर्वाधिक मंत्र), अग्नि, वरुण, मित्र, सोम।
- ▸उपयोग: 'होता' ऋत्विज इससे मंत्र पढ़ता है।
- ▸विषय: देवस्तुति, सृष्टि, प्रकृति, दर्शन।
2यजुर्वेद (Yajurveda)
- ▸दो भेद: शुक्ल यजुर्वेद (वाजसनेयी) और कृष्ण यजुर्वेद (तैत्तिरीय)।
- ▸यज्ञ-क्रिया की गद्यात्मक विधियाँ इसमें हैं।
- ▸उपयोग: 'अध्वर्यु' ऋत्विज इसका प्रयोग करता है।
- ▸विषय: यज्ञ-कर्मकांड, अनुष्ठान-पद्धति।
3सामवेद (Samaveda)
- ▸गान-प्रधान वेद — भारतीय संगीत का आदि स्रोत।
- ▸ऋग्वेद की ऋचाओं को विशेष स्वर-लय में गाया जाता है।
- ▸1875 मंत्र, जिनमें से 75 ही ऋग्वेद से भिन्न हैं।
- ▸उपयोग: 'उद्गाता' ऋत्विज इसे गाता है।
- ▸विषय: संगीत, स्तोत्र, उपासना।
4अथर्ववेद (Atharvaveda)
- ▸5977 मंत्र, 20 काण्ड।
- ▸विषय: आरोग्य, औषधि, गृहस्थ जीवन, शांतिकर्म, वशीकरण, ब्रह्मज्ञान।
- ▸'ब्रह्मा' ऋत्विज इसका ज्ञाता होता है।
- ▸तीनों वेदों की तुलना में अधिक लौकिक विषय समाहित हैं।
चारों से जुड़े ऋत्विज
होता (ऋग्वेद) | उद्गाता (सामवेद) | अध्वर्यु (यजुर्वेद) | ब्रह्मा (अथर्ववेद)।





