ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
वेद ज्ञान📜 ऋग्वेद 3/62/10, अथर्ववेद 11/6/14, मीमांसा दर्शन, नाद-ब्रह्म सिद्धांत, मांडूक्योपनिषद2 मिनट पठन

वेदों में मंत्रों का महत्व क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

वेदों में मंत्र नाद-ब्रह्म का स्वरूप हैं — शाश्वत ध्वनि-शक्ति जो देवताओं को आकर्षित करती और चित्त को शुद्ध करती है। गायत्री मंत्र (ऋग्वेद 3/62/10) 'वेद-माता' है। ॐ ब्रह्मांड की आदि-ध्वनि और ब्रह्म का प्रथम प्रकटीकरण है।

📖

विस्तृत उत्तर

## वेदों में मंत्रों का महत्व

मंत्र की परिभाषा: 'मननात् त्रायते इति मंत्रः' — जो मनन से त्राण दे, वह मंत्र है। वेदों में मंत्र केवल शब्द नहीं — ध्वनि-शक्ति के सूक्ष्म रूप हैं।

नाद-ब्रह्म सिद्धांत: वैदिक दर्शन में ध्वनि (नाद) ब्रह्म का पहला प्रकटीकरण है। 'ॐ' — प्रणव मंत्र — ब्रह्मांड की आदि-ध्वनि है। माण्डूक्योपनिषद में ॐ को ही ब्रह्म कहा गया है।

गायत्री मंत्र — वेदों का सार (ऋग्वेद 3/62/10): 'ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।' — हम सूर्यदेव के दिव्य तेज का ध्यान करते हैं जो हमारी बुद्धि को प्रेरित करे। यह 'वेद-माता' है।

मंत्रों का महत्व

  • ध्वनि-शक्ति: मीमांसा दर्शन के अनुसार वेद-मंत्र शाश्वत और अपौरुषेय हैं।
  • देव-आह्वान: यज्ञ में मंत्रोच्चारण से देवशक्तियाँ आकर्षित होती हैं।
  • चित्त-शुद्धि: अथर्ववेद (11/6/14) में मंत्रों को 'भेषज' (औषधि) कहा गया है।
  • आत्म-रक्षा: अथर्ववेद के रक्षा और आयुष्य-मंत्र जीवन-बाधाओं से रक्षा करते हैं।

मंत्र-साधना का नियम: सही उच्चारण, शुद्ध संकल्प, गुरु-दीक्षा और नियमित अभ्यास — तभी मंत्र का पूर्ण फल मिलता है।

📜
शास्त्रीय स्रोत
ऋग्वेद 3/62/10, अथर्ववेद 11/6/14, मीमांसा दर्शन, नाद-ब्रह्म सिद्धांत, मांडूक्योपनिषद
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

मंत्रवेदगायत्रीध्वनिशक्तिसाधनानाद-ब्रह्म

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

वेदों में मंत्रों का महत्व क्या है — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको वेद ज्ञान से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर ऋग्वेद 3/62/10, अथर्ववेद 11/6/14, मीमांसा दर्शन, नाद-ब्रह्म सिद्धांत, मांडूक्योपनिषद पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।