1. ऋग्वेद — देवस्तुति, 10552 मंत्र, होता ऋत्विज। 2. यजुर्वेद — यज्ञविधान, गद्यात्मक, अध्वर्यु। 3. सामवेद — संगीतमय ऋचाएँ, उद्गाता। 4. अथर्ववेद — आरोग्य, गृहस्थ, ब्रह्मा ऋत्विज। (स्रोत: मुण्डकोपनिषद, शतपथ ब्राह्मण)
- 1विश्व का सर्वप्राचीन साहित्यिक ग्रंथ।
- 210 मंडल, 1028 सूक्त, लगभग 10,552 मंत्र (ऋचाएँ)।
- 3मुख्य देवता: इन्द्र (सर्वाधिक मंत्र), अग्नि, वरुण, मित्र, सोम।
- 4उपयोग: 'होता' ऋत्विज इससे मंत्र पढ़ता है।
- 5विषय: देवस्तुति, सृष्टि, प्रकृति, दर्शन।
- 6दो भेद: शुक्ल यजुर्वेद (वाजसनेयी) और कृष्ण यजुर्वेद (तैत्तिरीय)।
- 7यज्ञ-क्रिया की गद्यात्मक विधियाँ इसमें हैं।
- 8उपयोग: 'अध्वर्यु' ऋत्विज इसका प्रयोग करता है।
- 9विषय: यज्ञ-कर्मकांड, अनुष्ठान-पद्धति।
- 10गान-प्रधान वेद — भारतीय संगीत का आदि स्रोत।
- 11ऋग्वेद की ऋचाओं को विशेष स्वर-लय में गाया जाता है।
- 121875 मंत्र, जिनमें से 75 ही ऋग्वेद से भिन्न हैं।
- 13उपयोग: 'उद्गाता' ऋत्विज इसे गाता है।
- 14विषय: संगीत, स्तोत्र, उपासना।
- 155977 मंत्र, 20 काण्ड।
- 16विषय: आरोग्य, औषधि, गृहस्थ जीवन, शांतिकर्म, वशीकरण, ब्रह्मज्ञान।
- 17'ब्रह्मा' ऋत्विज इसका ज्ञाता होता है।
- 18तीनों वेदों की तुलना में अधिक लौकिक विषय समाहित हैं।