ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
वेद ज्ञान⏱ 2 मिनट पठन

वेदों में कर्म का महत्व क्या है?

वेदों में कर्म केन्द्रीय है। यजुर्वेद (40/2) कहता है — कर्म करते हुए जियो। यज्ञ-कर्म सर्वोत्तम है।

संक्षिप्त उत्तर

वेदों में कर्म केन्द्रीय है। यजुर्वेद (40/2) कहता है — कर्म करते हुए जियो। यज्ञ-कर्म सर्वोत्तम है। शुभ कर्म से स्वर्ग — यह वैदिक कर्मफल-सिद्धांत है। निष्काम कर्म + ज्ञान = मोक्ष — यही वेदांत का निष्कर्ष है।

📖

विस्तृत उत्तर

## वेदों में कर्म का महत्व

वेदों में कर्म की केन्द्रीयता: वेद — विशेषतः यजुर्वेद और ब्राह्मण ग्रंथ — कर्मकाण्ड (यज्ञ, अनुष्ठान) पर आधारित हैं। पूर्वमीमांसा दर्शन में वेद-विहित कर्म को परम धर्म माना गया है।

वैदिक कर्म-सिद्धांत के मूल सूत्र

(1) कर्म अनिवार्य है (यजुर्वेद 40/2): 'कुर्वन्नेवेह कर्माणि जिजीविषेच्छतं समाः।' — कर्म करते हुए ही सौ वर्ष जीने की इच्छा रखो। कर्म त्याग नहीं, कर्म से लिप्त नहीं — यही ईशोपनिषद का संदेश है।

(2) यज्ञ-कर्म सर्वश्रेष्ठ: यज्ञ सर्वोत्तम कर्म — देव-मनुष्य-प्रकृति के बीच परस्पर उपकार का माध्यम।

(3) कर्मफल का सिद्धांत: शुभ कर्म स्वर्ग, अशुभ कर्म नरक का मार्ग है।

(4) नित्य-कर्म और काम्य-कर्म: संध्यावंदन, अग्निहोत्र, पितृतर्पण — नित्य अनिवार्य। पुत्र-प्राप्ति आदि इच्छा से किए गए यज्ञ — काम्य।

(5) कर्म और मोक्ष: पूर्वमीमांसा में कर्म से स्वर्ग मिलता है; उत्तर-मीमांसा (वेदांत) में निष्काम कर्म + ज्ञान + भक्ति से मोक्ष — यही गीता का संदेश।

वेद का संदेश: कर्म करो, फल परमात्मा को अर्पण करो — यही वैदिक कर्म-विज्ञान का सार है।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

वेदों में कर्म का महत्व क्या है को संदर्भ सहित समझें

वेदों में कर्म का महत्व क्या है का सबसे सीधा सार यह है: वेदों में कर्म केन्द्रीय है। यजुर्वेद (40/2) कहता है — कर्म करते हुए जियो। यज्ञ-कर्म सर्वोत्तम है। शुभ कर्म से स्वर्ग — यह वैदिक कर्मफल-सिद्धांत है। निष्काम कर्म...

वेद ज्ञान जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.

इसी विषय पर 5 संबंधित प्रश्न और 6 विस्तृत लेख भी उपलब्ध हैं। इसलिए इस उत्तर को शुरुआती निष्कर्ष मानें और नीचे दिए गए अगले पन्नों से पूरा संदर्भ जोड़ें।

•

उत्तर पढ़ते समय यह देखें कि उसमें नियम, अपवाद और व्यवहारिक संदर्भ साफ हैं या नहीं।

•

वेद ज्ञान श्रेणी के दूसरे प्रश्न इस उत्तर की सीमा और उपयोग दोनों स्पष्ट करते हैं।

•

यदि विस्तृत विधि या पृष्ठभूमि चाहिए, तो नीचे दिए गए लेख पहले खोलें।

वेद ज्ञान प्रश्नोत्तर
🔗

आगे क्या पढ़ें

प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी लिंक

इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
WhatsApp
क्या यह उत्तर सहायक था?

🏷 सम्बंधित विषय

कर्मवेदयज्ञकर्मकाण्डपूर्वमीमांसानित्य कर्म
📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

वेदों में कर्म का महत्व क्या है — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको वेद ज्ञान से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।

🙏 पूजा विधि📿 मंत्र जाप🔱 शिव पूजा🏠 वास्तु💭 सपनों का मतलब🪐 ज्योतिष

इसी विषय पर और प्रश्नोत्तर

टैग द्वारा खोजें:#कर्म#वेद#यज्ञ#कर्मकाण्ड#पूर्वमीमांसा#नित्य कर्म