ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
वेद ज्ञान📜 ऋग्वेद 10/149, अथर्ववेद 12/1 (पृथ्वी सूक्त), यजुर्वेद 36/17, ऋग्वेद 10/9 (आपः सूक्त)2 मिनट पठन

वेदों में प्रकृति का महत्व क्या है?

संक्षिप्त उत्तर

वेदों में प्रकृति देव-स्वरूप है। अथर्ववेद (12/1) का पृथ्वी सूक्त — 'माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः' — पृथ्वी को माता मानता है। ऋग्वेद में जल, वायु, सूर्य की स्तुति है। 'ऋत' की रक्षा वैदिक पर्यावरण-दर्शन का मूल है।

📖

विस्तृत उत्तर

## वेदों में प्रकृति का महत्व

वैदिक दृष्टि में प्रकृति: वेद प्रकृति को केवल संसाधन नहीं — देवीय शक्ति और जीवंत सत्ता मानते हैं। प्रत्येक तत्त्व — पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि, आकाश — देव-स्वरूप है।

पृथ्वी सूक्त (अथर्ववेद 12/1): 63 मंत्रों में भूमि-देवी की वंदना: 'माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः।' — पृथ्वी मेरी माता है, मैं उसका पुत्र हूँ। यह मानव की पृथ्वी के प्रति जिम्मेदारी की उद्घोषणा है।

जल-स्तुति (ऋग्वेद 10/9 — आपः सूक्त): 'आपो हि ष्ठा मयोभुवः।' — हे जल! तुम सुख देने वाले हो। जल पवित्र देव — पापनाशक और जीवनदायी।

वायु देव: ऋग्वेद (1/134) में वायु को देव, प्राण का आधार और ब्रह्म का श्वास कहा गया है।

ऋत — प्रकृति की व्यवस्था: सूर्योदय-सूर्यास्त, ऋतु-परिवर्तन, नदियों का प्रवाह — सब 'ऋत' के अनुसार। इस व्यवस्था की रक्षा करना मनुष्य का कर्तव्य है।

वैदिक पर्यावरण-चेतना (यजुर्वेद 36/17): 'द्यौः शान्तिः अन्तरिक्षं शान्तिः पृथिवी शान्तिः।' — आकाश, अंतरिक्ष और पृथ्वी पर शांति हो। अग्नि, वायु और जल को दूषित न करने के निर्देश अथर्ववेद में हैं।

📜
शास्त्रीय स्रोत
ऋग्वेद 10/149, अथर्ववेद 12/1 (पृथ्वी सूक्त), यजुर्वेद 36/17, ऋग्वेद 10/9 (आपः सूक्त)
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

प्रकृतिवेदपृथ्वीजलवायुपर्यावरणऋत

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

वेदों में प्रकृति का महत्व क्या है — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको वेद ज्ञान से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर ऋग्वेद 10/149, अथर्ववेद 12/1 (पृथ्वी सूक्त), यजुर्वेद 36/17, ऋग्वेद 10/9 (आपः सूक्त) पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।