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वेद परिचय📜 ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद — स्वयं वेद ग्रंथ; मनुस्मृति, विष्णु पुराण3 मिनट पठन

वेद क्या हैं?

संक्षिप्त उत्तर

वेद हिंदू धर्म के सर्वोच्च अपौरुषेय (ईश्वरीय) ग्रंथ हैं — ऋग्वेद (देव स्तुति), यजुर्वेद (यज्ञ विधि), सामवेद (संगीत पूजा), अथर्ववेद (जीवन विज्ञान)। वेदव्यास ने इन्हें चार भागों में विभाजित किया। प्रत्येक वेद में संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक और उपनिषद — चार भाग हैं।

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विस्तृत उत्तर

वेद हिंदू धर्म के सर्वोच्च और प्राचीनतम ग्रंथ हैं। इनकी उत्पत्ति और महत्व का वर्णन स्वयं वेदों, मनुस्मृति और विष्णु पुराण में मिलता है:

वेद का अर्थ

विद्' धातु से — 'जानना।' वेद = वह ज्ञान जो अनंत काल से है। मनुस्मृति: 'वेदोऽखिलो धर्ममूलम्' — वेद ही समस्त धर्म का मूल है।

वेदों की उत्पत्ति

हिंदू परंपरा में वेद 'अपौरुषेय' हैं — किसी मनुष्य की रचना नहीं। सृष्टि के आरंभ में ब्रह्मा जी ने परमात्मा से वेदज्ञान प्राप्त किया और ऋषियों को प्रदान किया। ऋषियों ने ध्यान में इसे 'सुना' — इसीलिए वेदों को 'श्रुति' कहते हैं।

वेदव्यास (कृष्णद्वैपायन) ने वेदों को चार भागों में विभाजित किया — इसीलिए उन्हें 'व्यास' कहते हैं।

चार वेद

1ऋग्वेद — सर्वप्राचीन

  • मंत्र: 10,552 ऋचाएं, 10 मंडल
  • विषय: देवताओं की स्तुति, सृष्टि का ज्ञान
  • प्रमुख देवता: अग्नि, इंद्र, सूर्य, वरुण
  • 'प्राज्ञानं ब्रह्म' — ज्ञान ही ब्रह्म है (ऐतरेय उपनिषद)

2यजुर्वेद — यज्ञ विद्या

  • मंत्र: लगभग 1975 मंत्र
  • विषय: यज्ञ की विधि, अनुष्ठान पद्धति
  • दो शाखाएं: कृष्ण यजुर्वेद और शुक्ल यजुर्वेद
  • श्री रुद्रम् और पुरुषसूक्त इसी में

3सामवेद — संगीत वेद

  • मंत्र: 1875 मंत्र
  • विषय: संगीत और गान के माध्यम से पूजा
  • अधिकांश मंत्र ऋग्वेद से लिए, किंतु सुर-ताल में
  • कृष्ण ने गीता में कहा — 'वेदानां सामवेदोऽस्मि'

4अथर्ववेद — जीवन विज्ञान

  • मंत्र: 5977 मंत्र, 20 काण्ड
  • विषय: आयुर्वेद, ज्योतिष, तंत्र, दैनिक जीवन
  • 'ब्रह्म वेद' भी कहलाता है
  • अथर्वन और अंगिरा ऋषि से संबंधित

वेदों के चार भाग

प्रत्येक वेद के चार भाग हैं:

  1. 1संहिता — मूल मंत्र
  2. 2ब्राह्मण — यज्ञ और अनुष्ठान व्याख्या
  3. 3आरण्यक — वन में ध्यान के लिए
  4. 4उपनिषद — दार्शनिक ज्ञान

वेदांग (वेद के छः अंग)

शिक्षा (उच्चारण), कल्प (अनुष्ठान), व्याकरण, निरुक्त (शब्दार्थ), छंद, ज्योतिष।

वेदों की आयु

पाश्चात्य विद्वान ऋग्वेद को 1500-1200 ईसापूर्व मानते हैं। भारतीय परंपरा के अनुसार वेद अनादि हैं — सृष्टि के साथ ही उत्पन्न।

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शास्त्रीय स्रोत
ऋग्वेद, सामवेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद — स्वयं वेद ग्रंथ; मनुस्मृति, विष्णु पुराण
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