विस्तृत उत्तर
वेद हिंदू धर्म के सर्वोच्च और प्राचीनतम ग्रंथ हैं। इनकी उत्पत्ति और महत्व का वर्णन स्वयं वेदों, मनुस्मृति और विष्णु पुराण में मिलता है:
वेद का अर्थ
विद्' धातु से — 'जानना।' वेद = वह ज्ञान जो अनंत काल से है। मनुस्मृति: 'वेदोऽखिलो धर्ममूलम्' — वेद ही समस्त धर्म का मूल है।
वेदों की उत्पत्ति
हिंदू परंपरा में वेद 'अपौरुषेय' हैं — किसी मनुष्य की रचना नहीं। सृष्टि के आरंभ में ब्रह्मा जी ने परमात्मा से वेदज्ञान प्राप्त किया और ऋषियों को प्रदान किया। ऋषियों ने ध्यान में इसे 'सुना' — इसीलिए वेदों को 'श्रुति' कहते हैं।
वेदव्यास (कृष्णद्वैपायन) ने वेदों को चार भागों में विभाजित किया — इसीलिए उन्हें 'व्यास' कहते हैं।
चार वेद
1ऋग्वेद — सर्वप्राचीन
- ▸मंत्र: 10,552 ऋचाएं, 10 मंडल
- ▸विषय: देवताओं की स्तुति, सृष्टि का ज्ञान
- ▸प्रमुख देवता: अग्नि, इंद्र, सूर्य, वरुण
- ▸'प्राज्ञानं ब्रह्म' — ज्ञान ही ब्रह्म है (ऐतरेय उपनिषद)
2यजुर्वेद — यज्ञ विद्या
- ▸मंत्र: लगभग 1975 मंत्र
- ▸विषय: यज्ञ की विधि, अनुष्ठान पद्धति
- ▸दो शाखाएं: कृष्ण यजुर्वेद और शुक्ल यजुर्वेद
- ▸श्री रुद्रम् और पुरुषसूक्त इसी में
3सामवेद — संगीत वेद
- ▸मंत्र: 1875 मंत्र
- ▸विषय: संगीत और गान के माध्यम से पूजा
- ▸अधिकांश मंत्र ऋग्वेद से लिए, किंतु सुर-ताल में
- ▸कृष्ण ने गीता में कहा — 'वेदानां सामवेदोऽस्मि'
4अथर्ववेद — जीवन विज्ञान
- ▸मंत्र: 5977 मंत्र, 20 काण्ड
- ▸विषय: आयुर्वेद, ज्योतिष, तंत्र, दैनिक जीवन
- ▸'ब्रह्म वेद' भी कहलाता है
- ▸अथर्वन और अंगिरा ऋषि से संबंधित
वेदों के चार भाग
प्रत्येक वेद के चार भाग हैं:
- 1संहिता — मूल मंत्र
- 2ब्राह्मण — यज्ञ और अनुष्ठान व्याख्या
- 3आरण्यक — वन में ध्यान के लिए
- 4उपनिषद — दार्शनिक ज्ञान
वेदांग (वेद के छः अंग)
शिक्षा (उच्चारण), कल्प (अनुष्ठान), व्याकरण, निरुक्त (शब्दार्थ), छंद, ज्योतिष।
वेदों की आयु
पाश्चात्य विद्वान ऋग्वेद को 1500-1200 ईसापूर्व मानते हैं। भारतीय परंपरा के अनुसार वेद अनादि हैं — सृष्टि के साथ ही उत्पन्न।





