विस्तृत उत्तर
यह पवित्र मंत्र मुख्य रूप से ऋग्वेद के सातवें मंडल (७.५९.१२) का एक महत्वपूर्ण श्लोक है, जिसे महर्षि वशिष्ठ द्वारा दृष्ट (रचित) माना जाता है।
ऋग्वेद के अतिरिक्त, इस मंत्र की महत्ता और सार्वभौमिकता का प्रमाण इस बात से मिलता है कि यह यजुर्वेद (तैत्तिरीय संहिता १.८.६.१; वाजसनेयी संहिता ३.६०) तथा अथर्ववेद (१४.१.१७) में भी पूर्ण प्रामाणिकता के साथ उद्धृत है।
शास्त्रों के अनुसार, जो शाश्वत सत्य और ब्रह्मांडीय नियम गुरुत्वाकर्षण की भांति सनातन हैं, उन्हें ऋषियों ने अपनी गहन समाधि और ध्यान की अवस्था में 'देखा' या 'सुना' था। महामृत्युंजय मंत्र भी एक ऐसा ही शाश्वत सत्य है जो ऋषियों के अंतःकरण में उद्घाटित हुआ।





