ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
महामृत्युंजय मंत्र परिचय⏱ 2 मिनट पठन

मार्कण्डेय और महामृत्युंजय मंत्र की कथा क्या है?

महर्षि मृकंडु ने अल्पायु किंतु गुणवान पुत्र मार्कण्डेय को चुना।

संक्षिप्त उत्तर

महर्षि मृकंडु ने अल्पायु किंतु गुणवान पुत्र मार्कण्डेय को चुना। १६ वर्ष की अल्पायु जानकर मार्कण्डेय ने शिवलिंग के समक्ष इस मंत्र का जप किया — जप ऊर्जा और शिव कृपा ने यमराज को पराजित किया और मार्कण्डेय चिरंजीवी हुए।

📖

विस्तृत उत्तर

मार्कण्डेय पुराण और शिव पुराण में वर्णित सर्वाधिक प्रसिद्ध कथा महर्षि मृकंडु और उनकी पत्नी मरुद्वती से संबंधित है। संतानहीन होने पर इस दंपति ने भगवान शिव की घोर तपस्या की।

भगवान शिव ने प्रसन्न होकर उन्हें वरदान का विकल्प दिया: या तो वे एक ऐसा पुत्र प्राप्त करें जो अत्यंत मेधावी और आध्यात्मिक गुणों से संपन्न हो परंतु उसकी आयु केवल १६ वर्ष हो, अथवा एक ऐसा पुत्र जो दीर्घायु हो परंतु मूर्ख हो। महर्षि मृकंडु ने अल्पायु परंतु गुणवान पुत्र का विकल्प चुना, जिसका नाम मार्कण्डेय रखा गया।

जब मार्कण्डेय १६ वर्ष के होने वाले थे, तब उन्हें अपनी अल्पायु का ज्ञान हुआ। वे एक शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग के समक्ष गहन ध्यान में बैठ गए और इसी महामृत्युंजय मंत्र का निरंतर जप करने लगे। जब मृत्यु के देवता यमराज स्वयं उनके प्राण हरने आए, तब उनके जप की असीम ऊर्जा और भगवान शिव की प्रत्यक्ष कृपा ने यमराज को भी पराजित कर दिया। भगवान शिव ने प्रकट होकर यमराज को लौटा दिया और मार्कण्डेय को चिरंजीवी होने का वरदान दिया।

🔗

आगे क्या पढ़ें

प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी लिंक

इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
WhatsApp
क्या यह उत्तर सहायक था?

🏷 सम्बंधित विषय

मार्कण्डेय कथामृकंडुयमराजचिरंजीवी वरदान
📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

मार्कण्डेय और महामृत्युंजय मंत्र की कथा क्या है — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको महामृत्युंजय मंत्र परिचय से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।

🙏 पूजा विधि📿 मंत्र जाप🔱 शिव पूजा🏠 वास्तु💭 सपनों का मतलब🪐 ज्योतिष

इसी विषय पर और प्रश्नोत्तर

टैग द्वारा खोजें:#मार्कण्डेय कथा#मृकंडु#यमराज#चिरंजीवी वरदान