विस्तृत उत्तर
सावित्री ने अपनी बुद्धिमत्ता का परिचय देते हुए यमराज से तीन वरदान माँगे। पहला वरदान था अपने नेत्रहीन ससुर के लिए नेत्र-ज्योति की प्राप्ति। दूसरा वरदान था उनका खोया हुआ राज्य वापस मिलना। और तीसरा वरदान था अपने लिए सत्यवान से सौ पुत्रों की प्राप्ति। यमराज ने बिना सोचे 'तथास्तु' कह दिया। जब उन्होंने तीसरा वरदान दिया तब उन्हें अपनी भूल का एहसास हुआ क्योंकि एक पतिव्रता स्त्री बिना अपने पति के पुत्रों को जन्म नहीं दे सकती थी।
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