विस्तृत उत्तर
मार्कण्डेय पुराण और शिव पुराण में वर्णित कथा के अनुसार, मार्कण्डेय की आयु केवल १६ वर्ष की थी। जब वे १६ वर्ष के होने वाले थे, तब उन्हें अपनी अल्पायु का ज्ञान हुआ। वे एक शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग के समक्ष गहन ध्यान में बैठ गए और इसी महामृत्युंजय मंत्र का निरंतर जप करने लगे।
जब मृत्यु के देवता यमराज स्वयं उनके प्राण हरने आए, तब उनके जप की असीम ऊर्जा और भगवान शिव की प्रत्यक्ष कृपा ने यमराज को भी पराजित कर दिया। भगवान शिव ने प्रकट होकर यमराज को लौटा दिया और मार्कण्डेय को चिरंजीवी होने का वरदान दिया।
इसी कारण इस मंत्र को 'मार्कण्डेय मंत्र' भी कहा जाता है।





