📖
विस्तृत उत्तर
माहेश्वर योग को ऋषियों ने ज्ञानस्वरूप दिव्य योग के रूप में सुनना चाहा। पाठ में कहा गया है कि भगवान् शंकर की अनुकम्पा से ज्ञान उत्पन्न होता है, ज्ञान से योग में प्रवृत्ति होती है और योग से मुक्ति मिलती है। आगे नन्दी द्वारा सनत्कुमार को बताए गए योग का वर्णन आता है और अंत में पशुपति रुद्र द्वारा प्रवर्तित योग को पाशुपतयोग कहा गया है।
📜
शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 7, PDF पृष्ठ 37, श्लोक 1-7 और 55
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?





