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विस्तृत उत्तर
परमेश्वर की कृपा से धर्म, ऐश्वर्य, ज्ञान, वैराग्य और मोक्ष सुलभ हो जाते हैं। पाठ में कहा गया है कि इसमें किसी प्रकार का संदेह नहीं करना चाहिए। यह कथन आत्मविद्या से अज्ञान नष्ट करके अपने भीतर ईश्वर दर्शन के बाद आता है। इसलिए परमेश्वर की कृपा केवल सिद्धियों तक सीमित नहीं, बल्कि धर्म, ज्ञान, वैराग्य और अंतिम मोक्ष तक पहुँचाने वाली बताई गई है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 9, PDF पृष्ठ 57, श्लोक 66
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