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विस्तृत उत्तर
महादेव ने ब्रह्मा को दिव्य योग, महान् कीर्ति, ऐश्वर्य, ज्ञानसम्पदा और वैराग्य प्रदान किया। इससे पहले ब्रह्मा ने एकाग्रचित्त होकर रौद्री गायत्री का ध्यान और जप किया तथा महादेव की शरण ली। उसी साधना के बाद परमेश्वर महादेव ने उन्हें ये वर प्रदान किए। इसलिए ब्रह्मा को मिला वर रौद्री गायत्री की उपासना, ध्यान और महादेव-शरणागति से जुड़ा है।
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शास्त्रीय स्रोत
श्रीलिङ्गमहापुराण, पूर्वभाग, अध्याय 13, PDF पृष्ठ 66, श्लोक 13-15
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