विस्तृत उत्तर
रसातल लोक में असुर सुरा और उत्तम व्यंजनों का भोग करते हुए समय की गति को भूल जाते हैं। वहाँ उन्हें बुढ़ापा, झुर्रियाँ, सफेद बाल, पसीने की दुर्गंध, शारीरिक थकान, व्याधि या ऊर्जा की कमी नहीं होती। रसातल में भव्य नगर, रत्न-स्फटिक और स्वर्ण से बने महल, सुंदर उद्यान, कल्पवृक्ष और दिव्य कमलों से भरे सरोवर हैं। यह सब रसातल को स्वर्ग से भी अधिक भोग-विलास का केंद्र बनाता है। फिर भी वहाँ के निवासी पूर्णतः भौतिकतावादी हैं और आध्यात्मिक ज्ञान तथा ईश्वरीय भक्ति से शून्य हैं।
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