विस्तृत उत्तर
महेश्वरी गाय का स्वरूप अत्यन्त दिव्य और विश्वरूप बताया गया है। वह चार पैरों वाली, चार वक्त्रों वाली, चार हाथों वाली, चार स्तनों वाली, चार नेत्रों वाली, चार सींगों वाली, चार दाढ़ों वाली और चार मुखों वाली थी। वह बत्तीस गुणों से युक्त, सभी दिशाओं में मुख रखने वाली, ईश्वररूपिणी, विश्वरूपा, श्रेष्ठ और महेश्वरस्वरूपिणी कही गई है। यह रूप साधारण गाय नहीं, बल्कि महेश्वर से प्रकट दिव्य धेनु का है।
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