विस्तृत उत्तर
देवी के चार हाथ मानव जीवन के पुरुषार्थ चतुष्टय — धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष — के प्रतीक हैं।
उनके दो हाथों में खिले हुए कमल आध्यात्मिक पूर्णता को दर्शाते हैं।
शेष दो हाथों में से एक अभय मुद्रा में है, जो भक्तों को दरिद्रता, भय और जीवन के संकटों से अभय (सुरक्षा) प्रदान करता है, जबकि दूसरा हाथ वरद मुद्रा में है, जो देवी की असीम उदारता और सभी सत्कामनाओं की पूर्ति का परिचायक है।
यह मुद्राएँ यह स्थापित करती हैं कि जिस समाज या व्यक्ति के पास श्री (लक्ष्मी) है, उसका प्रथम कर्तव्य समाज को भयमुक्त करना और दान (वरद) के माध्यम से दूसरों का पोषण करना है।
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