विस्तृत उत्तर
वितल लोक का प्राकृतिक सौंदर्य अत्यंत मनोहारी और विलासी बताया गया है। वहाँ सुंदर वन, नदियाँ, रमणीय सरोवर और कमलों से भरे जलाशय हैं। इन स्थानों पर नर कोकिल, अर्थात कोयल, और अन्य पक्षियों की मधुर ध्वनि निरंतर गूंजती रहती है। वहाँ की वायु अत्यंत सुगंधित और अनुकूल है। इस लोक में बुढ़ापा, रोग, पसीना, दुर्गंध या शारीरिक क्षय का कोई स्थान नहीं है। इसलिए वितल लोक का वातावरण भौतिक संताप से रहित और ऐंद्रिय सुख, विलासिता तथा मायावी सौंदर्य का चरम उत्कर्ष माना गया है।
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