योग अभ्यासयोग साधना के लिए कैसी जगह अच्छी होती है?योग साधना के लिये गुप्त, पवित्र, रमणीक, एकान्त, जन्तुरहित, शिवक्षेत्र, गुफा, वन या स्वच्छ सुगन्धित स्थान अच्छा बताया गया है।#योग स्थान#एकान्त#पवित्र स्थान
श्रीमद्भागवतवन में आत्मदेव को क्या करना था?गोकर्ण ने आत्मदेव को वन में शरीर-अभिमान और ममता छोड़कर भजन, साधुसेवा, काम-तृष्णा त्याग और कथा-रस में लगने को कहा।#आत्मदेव#वन#गोकर्ण उपदेश
श्रीमद्भागवतसंतान न मिलने पर आत्मदेव कहाँ गए?संतान न मिलने से दुखी आत्मदेव घर छोड़कर वन गए और प्यास लगने पर एक तालाब के पास बैठ गए।#आत्मदेव#वन#तालाब
लोकयक्ष किन वस्तुओं के रक्षक माने जाते हैं?यक्ष वन, पर्वत, झील, नगर, कबीलों और पृथ्वी में छिपे खजानों के रक्षक माने जाते हैं।#यक्ष रक्षक#खजाना#वन
लोकवितल लोक में प्राकृतिक सौंदर्य कैसा है?वितल लोक में सुंदर वन, नदियाँ, सरोवर, कमलयुक्त जलाशय, मधुर पक्षी-ध्वनि और सुगंधित वायु बताई गई है।#वितल प्राकृतिक सौंदर्य#वन#सरोवर
लोकतलातल में कौन-कौन से प्राकृतिक सौंदर्य हैं?तलातल में सुरम्य वन, नदियाँ, स्वच्छ सरोवर, कमल-ताल, उद्यान, सुगंध और मधुर संगीत हैं।#तलातल सौंदर्य#वन#नदियाँ
रामचरितमानस — बालकाण्डप्रतापभानु एक बार शिकार करते हुए कहाँ भटक गये?शिकार में सूअर का पीछा करते-करते गहरे वन में भटक गये। भूख-प्यास से व्याकुल, पानी बिना बेहाल। वहाँ एक कपटमुनि (कालकेतु — पराजित राजा) का आश्रम मिला — यहीं से प्रतापभानु के पतन की कथा शुरू होती है।#बालकाण्ड#प्रतापभानु#शिकार
रामचरितमानस — बालकाण्डपार्वतीजी ने अपनी तपस्या कहाँ की?पार्वतीजी ने वन (बिपिन) में जाकर तपस्या की। 'उर धरि उमा प्रानपति चरना। जाइ बिपिन लागीं तपु करना॥' — शिवजी के चरणों को हृदय में धारण करके वन में तप करने लगीं। सुकुमार शरीर होने पर भी सब भोग त्याग दिये।#बालकाण्ड#पार्वती तपस्या#वन