विस्तृत उत्तर
श्रीसूक्त और अन्य पौराणिक वर्णनों में गजलक्ष्मी का स्वरूप अत्यंत विलक्षण है, जहाँ देवी के दोनों ओर हाथियों द्वारा स्वर्ण कलशों से जल अभिषेक करने का वर्णन प्राप्त होता है।
हाथी प्रज्ञा (बुद्धि), शक्ति, राजसी वैभव, स्थिर प्रयास और वर्षा के बादलों का प्रतीक हैं।
हाथियों द्वारा निरंतर जल का अभिषेक जीवन में निरंतर प्रवाहित होने वाली ऊर्जा, पवित्रता और कृषि के लिए आवश्यक वर्षा को दर्शाता है।
यह अभिषेक इस बात का भी द्योतक है कि सच्ची समृद्धि निरंतर प्रवाहमान होनी चाहिए; रुकी हुई संपदा विष बन जाती है, जबकि प्रवाहित होती हुई संपदा समाज का कल्याण करती है।





