विस्तृत उत्तर
ऋग्वेद के परिशिष्ट भाग में वर्णित 'श्रीसूक्त' माँ लक्ष्मी के स्वरूप, उनकी शक्तियों और उनके भौतिक तथा आध्यात्मिक प्रतीकों का सबसे प्राचीन और प्रामाणिक वर्णन प्रस्तुत करता है।
पंद्रह ऋचाओं का यह समूह न केवल देवी की स्तुति है, अपितु यह भौतिक विज्ञान, मनोविज्ञान और आध्यात्मिकता का एक जटिल मिश्रण है, जिसमें प्रत्येक शब्द एक गहरे प्रतीक को दर्शाता है।


