विस्तृत उत्तर
श्रीसूक्त ऋग्वेद का खिल सूक्त है जो ऋग्वेद के पाँचवें मण्डल के अन्त में उपलब्ध होता है। इसमें मूल १५ मन्त्र हैं, सोलहवाँ फलश्रुति का है और आगे के ११ मन्त्र 'लक्ष्मीसूक्त' के नाम से परिशिष्ट रूप में जुड़े हैं। इस सूक्त के ऋषि आनन्द, कर्दम, श्रीद और चिक्लीत हैं — ये चारों श्री (लक्ष्मी) के पुत्र माने गये हैं। इसकी देवता श्री-लक्ष्मी हैं।
शुक्रवार को श्रीसूक्त का पाठ इसलिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि ज्योतिष शास्त्र में शुक्रवार का स्वामी शुक्र ग्रह है और शुक्र को धन, ऐश्वर्य, सौन्दर्य और सुख का कारक माना गया है — ये सभी गुण माता लक्ष्मी के स्वरूप से अभिन्न हैं। शुक्रवार माता लक्ष्मी और माता संतोषी का विशेष वार माना जाता है। इस दिन श्रीसूक्त के १५ मन्त्रों से घी की आहुति देने पर लक्ष्मी की कामना पूर्ण होती है — यही फलश्रुति में स्पष्ट कहा गया है। शास्त्र यह भी कहते हैं कि जो नित्य श्रीसूक्त का पाठ करे उसे इस संसार में समस्त सुख प्राप्त होते हैं। शुक्रवार न कर सकें तो नवरात्रि, दीपावली, अथवा किसी भी शुक्ल पक्ष में इसका पाठ फलदायी है।



