विस्तृत उत्तर
गायत्री छन्द वैदिक छन्दों में सर्वश्रेष्ठ और सर्वाधिक प्रचलित है। इसमें तीन पाद (चरण) होते हैं और प्रत्येक पाद में आठ वर्ण होते हैं — कुल २४ वर्ण। ऋग्वेद का प्रथम सूक्त (अग्नि सूक्त) इसी गायत्री छन्द में रचित है। सर्वप्रसिद्ध गायत्री मन्त्र — 'ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्' — भी इसी छन्द में है।
गायत्री छन्द की वैज्ञानिक विशेषताएँ अनेक शोधकर्ताओं को आकर्षित करती हैं। २४ वर्णों की संरचना में एक प्राकृतिक लय है जो उच्चारण के समय एक विशेष ध्वनि-तरंग उत्पन्न करती है। अनेक शोधों में यह पाया गया है कि गायत्री मन्त्र के उच्चारण से ३५.५० हर्ट्ज़ की ध्वनि-तरंगें उत्पन्न होती हैं जो मस्तिष्क की अल्फा तरंगों के साथ अनुनाद करती हैं — इससे एकाग्रता और मानसिक शान्ति बढ़ती है। 'धीमहि' और 'प्रचोदयात्' — ध्यान और प्रेरणा के ये दो शब्द मन को एक दिशा देते हैं। तीन पाद तीन कालों — भूत, भविष्य, वर्तमान — के प्रतीक भी माने गये हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि ये आधुनिक व्याख्याएँ हैं — परम्परागत शास्त्र में गायत्री छन्द का महत्व इसकी ध्वनि-संरचना और ऋषियों द्वारा सिद्ध उपयोगिता पर आधारित है।





