विस्तृत उत्तर
यदि दिनभर में केवल एक मंत्र जपने का समय हो तो शास्त्रों में गायत्री मंत्र को सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। यह सभी मंत्रों का माता-मंत्र है:
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।
यह मंत्र ऋग्वेद के विश्वामित्र ऋषि का है और यह सूर्य-ऊर्जा की उपासना का मंत्र है। इसका अर्थ है — हम उस देदीप्यमान सविता देव के श्रेष्ठ तेज का ध्यान करते हैं, वे हमारी बुद्धि को प्रेरित करें।
गायत्री मंत्र क्यों सर्वश्रेष्ठ — इसे जपने से बुद्धि, विवेक, स्वास्थ्य और आत्मशुद्धि — सभी का लाभ एक साथ मिलता है। यह तीनों लोकों (भूः भुवः स्वः) और तीनों कालों में कल्याणकारी है।
यदि गायत्री मंत्र न जप सकें तो अपने इष्टदेव का सरल नाम-जप भी पर्याप्त है:
शिव भक्त — 'ॐ नमः शिवाय'
विष्णु भक्त — 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय'
राम भक्त — 'श्री राम जय राम जय जय राम'
कृष्ण भक्त — 'हरे कृष्ण हरे राम'
रामचरितमानस में तुलसीदासजी ने कहा है — 'राम नाम मनि दीप धरु जीह देहरी द्वार' — अर्थात राम-नाम रूपी मणि-दीप को जीभ रूपी देहरी पर रख दो।





