विस्तृत उत्तर
भगवान कृष्ण प्रेम और आनंद के देव हैं। उनकी कृपा के संकेत भी उसी प्रेम-आनंद के रंग में होते हैं।
आंतरिक संकेत — जब कृष्ण की कृपा होती है तो मन में एक अजीब मिठास और आनंद का बोध होने लगता है जो बिना किसी बाहरी कारण के होता है। वंशी की धुन सुनकर या 'राधे-कृष्ण' नाम सुनकर आँखों में आँसू आ जाएँ — यह भक्ति की परिपक्वता और कृपा का संकेत है।
जीवन में परिवर्तन — भगवान कृष्ण की कृपा में व्यक्ति निष्काम कर्म की ओर स्वाभाविक रूप से झुकने लगता है। गीता के श्लोक अचानक अधिक समझ में आने लगें, जीवन की जटिलताएँ सरल लगने लगें — यह कृपा का संकेत है।
बाहरी संकेत — जहाँ कहीं मोर-पंख, पीले वस्त्र, या वंशी दिखे — वहाँ मन अकारण कृष्ण की ओर खिंचे। वृंदावन, मथुरा या किसी कृष्ण-मंदिर में जाने की अचानक इच्छा होना भी एक संकेत है।
प्रेम-भाव — गोपी-भाव में यह माना जाता है कि जब कृष्ण से अलगाव का दर्द महसूस होने लगे, जब उनसे मिलने की तड़प उठे — यह उनकी सबसे गहरी कृपा है क्योंकि उन्होंने हृदय में अपनी जगह बना ली।





