विस्तृत उत्तर
भगवान विष्णु धर्म और नैतिकता के रक्षक हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि जब कोई धर्म-विरुद्ध आचरण करता है, असत्य बोलता है, दूसरों को कष्ट देता है, या पूजा-विधान में लापरवाही करता है — तो विष्णुजी की अनुकम्पा दूर होती है।
जीवन में संकेत — जब धन अर्जित होने के बाद भी हाथ में नहीं टिकता, परिवार में अशांति और कलह बनी रहती है, सद्कार्यों में भी बाधाएँ आती हैं, व्यापार या नौकरी में अकारण हानि हो — ये संकेत हो सकते हैं कि धर्म-विरुद्ध आचरण हो रहा है।
पूजा में त्रुटियाँ — विष्णु जी को बासी फूल चढ़ाना, तुलसी के बिना पूजा करना (तुलसी विष्णु को अत्यंत प्रिय है), एकादशी को अनावश्यक अन्न-भोजन — ये पूजा के दोष हैं।
शास्त्रीय दृष्टि — विष्णु पुराण में कहा गया है कि जो व्यक्ति परमार्थ छोड़कर केवल स्वार्थ में लिप्त होता है, दूसरों के अधिकार हरता है और झूठ बोलता है — उसके जीवन से लक्ष्मी-विष्णु की कृपा दूर हो जाती है।
सुधार — एकादशी व्रत, विष्णु सहस्रनाम पाठ, तुलसी-पूजन और सत्य-आचरण से पुनः कृपा प्राप्त होती है।





