विस्तृत उत्तर
मंत्र जप एक विज्ञान है — केवल संख्या गिनना काफी नहीं। शास्त्रों में मंत्र-सिद्धि के लिए कुछ आवश्यक तत्व बताए गए हैं।
मंत्र जप में फल न मिलने के कारण:
श्रद्धा और भाव की कमी — मंत्र की शक्ति भाव से जागती है। यदि मन कहीं और हो और जीभ मंत्र बोल रही हो — तो फल कम होगा।
गलत उच्चारण — संस्कृत मंत्रों का सटीक उच्चारण महत्वपूर्ण है। किसी योग्य गुरु या विद्वान से मंत्र सीखें।
संख्या की अपेक्षा गुण — 108 बार जप यांत्रिक ढंग से करने से बेहतर है 10 बार पूरी एकाग्रता से जप।
मंत्र की दीक्षा — कुछ मंत्रों की दीक्षा (initiation) आवश्यक होती है। बिना दीक्षा के मंत्र का पूर्ण फल नहीं मिलता।
नियम का पालन — मंत्र जप में नियमितता, पवित्रता और संयम आवश्यक हैं। बीच में छूट जाना, असंयमित जीवन — ये प्रभाव कम करते हैं।
प्रारब्ध — मंत्र कर्मफल को बदलता है, पर प्रारब्ध को तत्काल नहीं मिटाता।
उपाय:
मंत्र जप में मन लगाएँ — जो मंत्र बोल रहे हों उसका अर्थ जानें और उसे भाव से महसूस करें।
नियमित समय — प्रतिदिन एक ही समय पर जप करें — विशेषतः ब्रह्म मुहूर्त में।
फल की चिंता छोड़ें — 'कर्म करो, फल की चिंता मत करो' — यह गीता का सार है। जब फल की आसक्ति छूटती है तो फल जल्दी आता है।





