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मंत्र जप व्यावहारिक📜 भक्ति परंपरा, योग शास्त्र1 मिनट पठन

मंत्र जप में मन नहीं लगता तो क्या उपाय करें?

संक्षिप्त उत्तर

वाचिक/बोलकर। धीमी गति। अर्थ सोचें। देवता रूप कल्पना। श्वास संयोजन। 5 मिनट से शुरू। विचार = स्वीकार, वापस मंत्र। गीता: 'अभ्यासेन वैराग्येण च।' धैर्य।

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विस्तृत उत्तर

जप में मन न लगे — उपाय:

  1. 1वाचिक → उपांशु: बोलकर जपें — ध्वनि पर ध्यान = मन लगे।
  2. 2धीमी गति: जल्दबाजी नहीं — प्रत्येक अक्षर स्पष्ट, धीमा।
  3. 3अर्थ ध्यान: मंत्र का अर्थ जानें — अर्थ सोचते हुए जप = एकाग्रता।
  4. 4देवता रूप: जप करते समय इष्ट देवता का रूप मन में — दृश्य + ध्वनि = एकाग्रता।
  5. 5श्वास संयोजन: श्वास लेते = मंत्र प्रथम भाग, छोड़ते = शेष। जैसे: श्वास→'ॐ', छोड़→'नमः शिवाय'।
  6. 6छोटी अवधि: 5-10 मिनट — धीरे-धीरे बढ़ाएं। जबरदस्ती 1 घंटा = विफल।
  7. 7विचार आएं = स्वीकार: 'विचार आया' — ठीक, वापस मंत्र पर। लड़ें नहीं।
  8. 8धैर्य: मन = चंचल स्वभाव। अभ्यास से शांत होगा — 'अभ्यासेन तु कौन्तेय वैराग्येण च गृह्यते' (गीता 6.35)।
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शास्त्रीय स्रोत
भक्ति परंपरा, योग शास्त्र
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