विस्तृत उत्तर
जप में नींद — उपाय:
- 1आंखें अर्ध-खुली: बंद = नींद। नासिकाग्र/दीपक पर दृष्टि।
- 2वाचिक जप: बोलकर → ध्वनि = जागृत।
- 3गति बदलें: तीव्र → धीमी → तीव्र = monotony टूटे।
- 4खड़े होकर: 5 मिनट खड़े → फिर बैठें।
- 5ठंडा जल: चेहरे पर।
- 6समय बदलें: ब्रह्ममुहूर्त = नींद अधिक → संध्या में जप।
- 7भोजन: जप पूर्व भारी भोजन नहीं → हल्का/खाली पेट।
- 8नींद पूरी करें: रात्रि 7-8 घंटे → प्रातः जप = तरोताजा।
सार: नींद = शरीर संकेत (विश्राम चाहिए)। पहले नींद पूरी → फिर जप। 'थका शरीर = अशुद्ध जप।'





