विस्तृत उत्तर
हां — बीमारी में लेटे हुए जप पूर्णतः मान्य:
शास्त्रीय: नियम गृहस्थ/स्वस्थ व्यक्ति के लिए। बीमार = अपवाद — ईश्वर = करुणामय।
क्या कर सकते हैं
- 1मानस जप (मन में) — सर्वोत्तम। कोई शारीरिक नियम नहीं।
- 2उपांशु (फुसफुसाकर) — संभव हो तो।
- 3सुनना: मंत्र/भजन ऑडियो सुनें = श्रवण भक्ति = शुभ।
- 4माला: हाथ में माला = संभव हो तो। नहीं = मन में गिनती।
नहीं चाहिए: स्नान, आसन, दिशा, तिलक — कोई बाहरी नियम नहीं।
सार: 'भगवान भाव देखते हैं, शरीर नहीं।' बीमार भक्त का एक 'ॐ' = स्वस्थ का सवा लाख।





