विस्तृत उत्तर
मंत्र जप में एकाग्रता का न आना — यह अनुभव लगभग हर साधक को होता है। इसके कुछ व्यावहारिक और शास्त्रसम्मत उपाय हैं।
मंत्र का अर्थ जानें — जिस मंत्र का जप करते हैं उसका अर्थ और भाव जानें। जब मंत्र के शब्दों के पीछे का अर्थ मन में हो तो एकाग्रता सहज आती है। 'ओम नमः शिवाय' — इन पाँच अक्षरों में पंचतत्व हैं — इसे जानकर जपने से मंत्र जीवंत हो जाता है।
माला का उपयोग — माला पर जप करें — हर मनका एक लंगर है जो मन को वर्तमान में बाँधे रखता है। स्पर्श-इंद्रिय सक्रिय रहने से मन कम भटकता है।
स्थिर आसन — पद्मासन, वज्रासन या सुखासन में बैठकर जप करें। शरीर की स्थिरता मन की स्थिरता में सहायक है।
धीरे जपें — बहुत तेज या यांत्रिक जप से एकाग्रता नहीं आती। थोड़ा धीमा, स्पष्ट और भावपूर्ण जप करें।
आँखें बंद या अर्धखुली — आँखें पूरी खुली हों तो ध्यान बाहर जाता है, बंद हों तो विचार आते हैं — अर्धखुली आँखें एक संतुलन देती हैं।
समय — ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से 1.5 घंटे पहले) में जप सबसे प्रभावशाली होता है। तब बाहरी शोर कम होता है और मन ताजा होता है।
संख्या से गुण की ओर — 1000 बार यांत्रिक जप से बेहतर 108 बार पूरे भाव से जप।





