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विस्तृत उत्तर
पराजित और हताश देवता इंद्र के नेतृत्व में पहले सृष्टिकर्ता ब्रह्मा और फिर संरक्षक भगवान विष्णु के पास सहायता के लिए पहुँचे। तब भगवान विष्णु ने इस संकट का एकमात्र समाधान बताया। उन्होंने कहा कि वृत्र को केवल एक ऐसे अस्त्र से मारा जा सकता है जो पारंपरिक सामग्रियों से न बना हो। यह अस्त्र एक महान ऋषि की अस्थियों से बनाया जाना था जिनकी अस्थियों में अपार तपस्या का तेज समाहित हो — और वे ऋषि थे महर्षि दधीचि।
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