विस्तृत उत्तर
भगवान कृष्ण का जीवन स्वयं में एक विश्वकोश है। उनकी हर लीला एक गहरी शिक्षा देती है।
भगवद्गीता की शिक्षा — कृष्ण ने अर्जुन को जो ज्ञान दिया वह संसार का सर्वोच्च जीवन-दर्शन है — 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन' — फल की चिंता किए बिना कर्म करो। यह शिक्षा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है — परिणाम पर नहीं, प्रयास पर ध्यान दो।
मित्रता की शिक्षा — कृष्ण और सुदामा की मित्रता दुनिया की सबसे उदात्त मित्रता का उदाहरण है। सुदामा निर्धन थे परंतु कृष्ण ने उन्हें बिना माँगे सब कुछ दे दिया। शिक्षा — सच्ची मित्रता में स्वार्थ नहीं होता।
धर्म-रक्षा — कुरुक्षेत्र में कृष्ण ने अर्जुन को युद्ध करने की प्रेरणा दी क्योंकि वह धर्म का युद्ध था। शिक्षा — अन्याय के सामने चुप रहना भी पाप है। जो कर्तव्य है वह करना ही पड़ेगा।
नश्वरता की स्वीकृति — कृष्ण ने कहा — 'जातस्य हि ध्रुवो मृत्युः ध्रुवं जन्म मृतस्य च' — जो जन्मा है वह मरेगा, जो मरा है वह जन्मेगा। शिक्षा — मृत्यु से डरो नहीं, अपने कर्तव्य में लगे रहो।
प्रेम — राधा-कृष्ण का प्रेम सांसारिक प्रेम नहीं, आत्मा और परमात्मा का मिलन है। शिक्षा — सर्वोच्च प्रेम वह है जो बिना अपेक्षा के हो।





