विस्तृत उत्तर
देवी सूक्तम् (ऋग्वेदीय): ऋग्वेद (10.125) का यह सूक्त दुर्गा सप्तशती के पाठ के अंत में या आरंभ में पढ़ा जाता है। वाक् आम्भृणी द्वारा रचित यह सूक्त देवी के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है।
इसके पाठ से मानसिक तनाव दूर होता है, नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है और साधक को आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।





