विस्तृत उत्तर
दुर्गा सूक्तम्: महानारायण उपनिषद और तैत्तिरीय आरण्यक में संकलित 'दुर्गा सूक्तम्' भगवान अग्नि और देवी दुर्गा की स्तुति करता है। इसमें ७ श्लोक हैं।
इस सूक्त में अग्नि (जातवेदस) को एक नाविक के रूप में वर्णित किया गया है जो भक्त को संसार रूपी भवसागर की कठिनाइयों (दुर्गम विपत्तियों) से पार ले जाकर मुक्ति (मोक्ष) प्रदान करता है।
दुर्गा सूक्तम् का पाठ जीवन के संकटों को दूर करने के लिए अत्यंत प्रभावशाली माना गया है।





