विस्तृत उत्तर
श्री सूक्त (लक्ष्मी सूक्तम्) ऋग्वेद का खिल सूक्त — लक्ष्मी आराधना का सर्वोच्च वैदिक स्तोत्र:
संरचना (Wikipedia Hindi verified)
15 ऋचाएं + 1 फलश्रुति = 16 ऋचाएं। ऋषि: आनन्द, कर्दम, श्रीद, चिक्लीत (श्री के पुत्र)। 15 ऋचाओं का षोडशोपचार क्रम में विनियोग।
कब (शोध — AajTak/BhaktVatsal/Webdunia)
- ▸प्रतिदिन — सर्वोत्तम (नित्य = 7 जन्म निर्धनता नहीं — ऋग्वेद)।
- ▸शुक्रवार — लक्ष्मी का दिन (समय न हो तो)।
- ▸पूर्णिमा/अष्टमी — विशेष शुभ।
- ▸दीपावली — अनिवार्य।
- ▸नवरात्रि, विवाह, गृहप्रवेश — विशेष अवसर।
कैसे (AajTak/Webdunia verified)
- 1स्नान → सफेद/गुलाबी वस्त्र।
- 2लाल/गुलाबी आसन पर बैठें।
- 3लक्ष्मी चित्र/प्रतिमा + श्रीयंत्र समक्ष।
- 4घी दीपक जलाएं।
- 5कमल/गुलाब + इत्र/सुगंधित द्रव्य अर्पित।
- 6सभी 16 ऋचाओं का पाठ (माहात्म्य सहित — बिना माहात्म्य = अपूर्ण)।
- 7प्रत्येक श्लोक पर पुष्प/इत्र अर्पित।
- 8पाठ बाद आरती। विष्णु पूजा भी करें (लक्ष्मी = विष्णुपत्नी)।
- 9अनुष्ठान: सवा लाख पाठ + दशांश हवन (बेलपत्र+खीर आहुति)।
फलश्रुति (16वीं ऋचा): 'यः शुचिः प्रयतो भूत्वा जुहुयादाज्यमन्वहम्। सूक्तं पञ्चदशर्चं च श्रीकामः सततं जपेत्॥' — जो शुद्ध होकर प्रतिदिन घी हवन + 15 ऋचा जप करे = अतुल लक्ष्मी।





