विस्तृत उत्तर
ऋग्वेद में वर्णित 'श्री सूक्त' माता महालक्ष्मी को प्रसन्न करने और स्थिर धन-धान्य की प्राप्ति का सबसे प्रामाणिक और प्राचीन वैदिक स्तोत्र है। इसमें 15 ऋचाएं (मंत्र) हैं जो लक्ष्मी के स्वर्णिम और अत्यंत तेजोमय स्वरूप का वर्णन करती हैं।
इसका प्रथम और सबसे शक्तिशाली मंत्र है—'ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम्। चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह॥' (अर्थात: हे अग्निदेव, स्वर्ण के समान रंग वाली, सोने और चांदी की माला पहनने वाली, चंद्रमा के समान प्रसन्न और स्वर्णमयी लक्ष्मी जी का मेरे लिए आवाहन करें)। शुक्रवार के दिन या दीपावली की रात्रि को श्री यंत्र के सम्मुख कमल के पुष्प चढ़ाते हुए पूरे श्री सूक्त का पाठ करना या हवन में आहुति देना दरिद्रता को हमेशा के लिए जड़ से मिटा देता है।





