विस्तृत उत्तर
रात्रि सूक्त (रात्रि देवी सूक्त) ऋग्वेद का एक प्रसिद्ध सूक्त है और दुर्गा सप्तशती के अंगपाठ में भी सम्मिलित है।
रात्रि सूक्त का परिचय
- ▸ऋग्वेद, मण्डल 10, सूक्त 127 में वर्णित।
- ▸इसमें रात्रि को देवी के रूप में स्तुति की गई है।
- ▸रात्रि = अज्ञान का अंधकार, और देवी = उस अंधकार में प्रकाश।
पाठ का समय
1रात्रि में (प्रमुख)
- ▸सायंकाल या रात्रि पूजा के समय।
- ▸शयन से पूर्व — रात्रि में सुरक्षा की प्रार्थना।
2सप्तशती पाठ के अंग के रूप में
- ▸दुर्गा सप्तशती के पाठ में अंगपाठ क्रम में।
3विशेष अवसर
- ▸नवरात्रि (विशेषकर जागरण की रात)।
- ▸महाशिवरात्रि (रात्रि जागरण)।
- ▸अमावस्या रात्रि।
- ▸काली पूजा (दीपावली रात्रि)।
4भय निवारण हेतु
- ▸रात्रि में भय लगता हो तो शयन पूर्व इसका पाठ करें।
- ▸बुरे स्वप्न आते हों तो नियमित पाठ करें।
पाठ का फल
- ▸रात्रि के भय से मुक्ति।
- ▸नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा।
- ▸शांतिपूर्ण निद्रा।
- ▸अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान प्रकाश की प्राप्ति।
प्रमुख श्लोक: 'रात्री व्यख्यदायती पुरुत्रा देव्यक्षभिः' — 'तारों से सुशोभित रात्रि देवी चारों ओर से प्रकाशित हो रही हैं।'





