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देवी ग्रंथ📜 दुर्गा सप्तशती (कवच), मार्कण्डेय पुराण2 मिनट पठन

देवी कवच का पाठ करने से कैसी सुरक्षा मिलती है?

संक्षिप्त उत्तर

देवी कवच = आध्यात्मिक सुरक्षा कवच। शरीर के प्रत्येक अंग की नवदुर्गा से रक्षा प्रार्थना। सुरक्षा: शारीरिक, नकारात्मक शक्तियों, शत्रु, दुर्घटना, रोग — सब से। सप्तशती पूर्व या नित्य पाठ। शुद्ध उच्चारण आवश्यक। ब्रह्माजी द्वारा वर्णित।

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विस्तृत उत्तर

देवी कवच (दुर्गा कवच) दुर्गा सप्तशती का प्रमुख अंग है। इसमें ब्रह्माजी द्वारा देवी की नौ मूर्तियों (नवदुर्गा) से शरीर के प्रत्येक अंग की रक्षा की प्रार्थना की गई है।

कवच = आध्यात्मिक सुरक्षा कवच (spiritual armor)

1शारीरिक सुरक्षा

कवच में शरीर के प्रत्येक अंग — मस्तक, नेत्र, कान, नासिका, ओष्ठ, कंठ, हृदय, उदर, पृष्ठ, बाहु, चरण — प्रत्येक की रक्षा के लिए विभिन्न देवी स्वरूपों से प्रार्थना की गई है।

2नकारात्मक शक्तियों से रक्षा

भूत, प्रेत, पिशाच, राक्षस और सभी प्रकार की अदृश्य नकारात्मक शक्तियों से सुरक्षा।

3शत्रु बाधा निवारण

दृश्य और अदृश्य शत्रुओं से रक्षा। कोर्ट-कचहरी, मुकदमों और विवादों में विजय।

4दुर्घटना और अकाल मृत्यु से रक्षा

मार्ग में, यात्रा में, जल-थल-आकाश में — सर्वत्र सुरक्षा।

5रोग निवारण

सभी प्रकार के रोगों और व्याधियों से रक्षा।

पाठ विधि

  • प्रतिदिन प्रातःकाल या सप्तशती पाठ से पूर्व।
  • नवरात्रि में प्रतिदिन अवश्य।
  • शुद्ध उच्चारण अत्यंत आवश्यक।

कवच का वचन

या देवी सर्वभूतेषु शक्तिरूपेण संस्थिता' — जो देवी सभी प्राणियों में शक्ति रूप में विराजमान हैं, वही कवच रूप में साधक की रक्षा करती हैं।
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शास्त्रीय स्रोत
दुर्गा सप्तशती (कवच), मार्कण्डेय पुराण
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