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देवी ग्रंथ📜 देवी भागवत पुराण, शाक्त परंपरा2 मिनट पठन

देवी भागवत पुराण का पाठ कब और कैसे करना चाहिए?

संक्षिप्त उत्तर

देवी भागवत = शाक्त प्रमुख ग्रंथ (12 स्कंध, 318 अध्याय)। पाठ: नवरात्रि सर्वोत्तम, शुक्रवार, पूर्णिमा। 7 या 9 दिन में सम्पूर्ण। सात्विक आहार, ब्रह्मचर्य। पूर्ण होने पर हवन+दान। विषय: देवी = सर्वोच्च ब्रह्म। फल: पाप नाश, भोग-मोक्ष।

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विस्तृत उत्तर

देवी भागवत पुराण अठारह महापुराणों में (कुछ मतों में उपपुराण) गिना जाता है। यह शाक्त संप्रदाय का प्रमुख ग्रंथ है जिसमें देवी को सर्वोच्च ब्रह्म के रूप में वर्णित किया गया है। इसमें 12 स्कंध और 318 अध्याय हैं।

पाठ कब करें

  1. 1नवरात्रि — सर्वोत्तम (शारदीय और चैत्र दोनों)।
  2. 2अश्विन मास — विशेष महत्व।
  3. 3शुक्रवार — देवी का दिन।
  4. 4पूर्णिमा और अमावस्या।
  5. 5देवी जयंती, दुर्गाष्टमी।
  6. 6विपत्ति या संकट काल में पाठ विशेष फलदायी।

पाठ विधि

  1. 1स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण।
  2. 2देवी प्रतिमा/चित्र के सामने बैठें।
  3. 3संकल्प लें — कितने दिनों में, किस उद्देश्य से पाठ करेंगे।
  4. 4प्रतिदिन निश्चित स्कंध/अध्याय पढ़ें।
  5. 57 दिन या 9 दिन (नवरात्रि) में सम्पूर्ण पाठ का विधान।
  6. 6सात्विक आहार, ब्रह्मचर्य।
  7. 7पाठ पूर्ण होने पर हवन, दान, ब्राह्मण भोजन।

मुख्य विषय: देवी का ब्रह्म स्वरूप, सृष्टि रचना, देवी चरित्र, भक्ति महिमा, धर्म शिक्षा, नरक-स्वर्ग वर्णन।

फल: सर्व पाप नाश, देवी कृपा, भोग-मोक्ष दोनों।

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शास्त्रीय स्रोत
देवी भागवत पुराण, शाक्त परंपरा
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